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pyaar ka matlab

वो पूछते रहे रात भर प्यार का मतलब हमसे,
करते रहे पढ़ने की कोशिश अनपढ़ी किताब…

हम भी रात भर घोंटते रहे गला अपने चीखते हुए दिल का,
डरते रहे निकल न जाये कही वो बात अनकही…

प्यार और दिल का न जाने ये कैसा अजीब रिश्ता है,
कभी कोई शैतान तो कोई फरिश्ता है…

ज़िन्दगी में फैसले बड़े कठिन लगे हमें,
कभी आग में जले तो कभी अँधेरे में थमे…

फिर न जाने ये ज़िन्दगी कैसे मोड़ पर ले आई,
हमारे अंदर कश्मकश ने कैसी आंधी सी मचाई…

तबाह हुए ऐसे की फिर संभल न सके,
अपने प्यार का मतलब दिल के तूफानों से बचा न सके…

मन की संवेदना सब शून्य हो चुकी है,
लफ्ज़, अल्फाज़ो की बस राख सी बची है…

तुम्हे क्या समझाते की जो खुद समझ ना सके हम,
बस कहते रहे की अब हमारे प्यार का मतलब हो बस तुम…

तुम जिसे हमने प्यार का मतलब बनाया,
और अपने प्यार का मतलब भी बस तुम्ही से पाया.

 

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सिगरेट

Posted: August 11, 2014 in Hindi poems
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यूँ बैठे है शाम से न जाने किस दुनिया में खोये…
ढूंढ रहे है मतलब आती जाती साँसों का

सिगरेट की राख से हवाओ ने तुम्हारा नाम सा लिख दिया है…
शायद याद दिलाने को जो कभी कहा था तुमने

की दिल की आग नहीं बुझेगी इस तरह सुलगने से…
और प्यास नहीं बुझेगी यूँ दिन रात धुंआ पीने से

हम समझाते रहे अपने आप को की ये सब है बस फालतू की बातें…
और आजकल बिता देते है खुली आँखों से सारी रातें

लफ्ज़ नहीं मिलते आज भी, की तुम्हे बता सके…
अलफ़ाज़ ही नहीं आते ज़बान पर की तुम्हे समझा सके

यूं सुलगती हुई सिगरेट से निकलता हुआ धुंआ…
असल में मेरे दिल का अक्स है

और जो राख से लिखा हुआ है नाम तुम्हारा…
वह असल में राख हुआ दिल है हमारा

ये सोच कर होठों से लगाये रखता हूँ इन्हे…
शायद तुम्हे कभी पता चले…
की मेरी आग मुझमे मरी नहीं

बस तरीके बदल गए है तुम्हे प्यार जताने के

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दुसरो का नाम लेकर, साँसों को कुछ पल रोक कर…
दिल को समझा दे रहे है की…
ये हिचकियाँ तुम्हारे नाम की नहीं

आँखों को बार बार रगड़ मसल कर…
दिल को समझा दे रहे है की…
ये आंसू तुम्हारे नाम के नहीं

चढ़ती उतरती धड़कनो को काबू करके…
दिल को समझा दे रहे है की…
ये बेचैनी तुम्हारे नाम की नहीं

सोचते है बहुत, जब कभी अकेले होते है…
की सीख ली धोखेबाज़ी हमने आखिर

अपने आप को धोखा देकर दिल को ये समझा रहे है की…
इसकी वजह तुम्हारे नाम की नहीं

अपने ही अंदर मशाल लिए ढूंढ़ते फिरते है अपने आप को…
पर मिलते है सिर्फ तुम्हारी यादों के निशान…

और हम दिल को ये समझा दे रहे है की…
ये यादें तुम्हारे नाम की नहीं….

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हम रोज़ तलाश करते है,
वो हंसी मज़ाक में लिपटी रातें…
वो खिलखिलाहटों की लड़ी,
वो ख़ुशी से निकलता प्यार…
जब हँसते हुए आँखे नम थी पड़ी हमारी,
जब ख़ुशी से साँसे फूली हुई थी तुम्हारी…
वो नुक्कड़ के पत्थर पर देर रात तक गप्पे मारना,
वो दुसरो की नक़ल उतारना वो फालतू की बातें बनाना…आज भी जब उस नुक्कड़ से निकलते है,
वो पत्थर तुम्हे आवाज़ लगाते है…वो रातें उदास सी आज भी तुम्हारी राह तकती है…वो छूटे हुए मोड़ आज भी तुम्हारी हंसी को तरसते है…हम ढूंढ़ते है आज भी ज़िन्दगी के लम्हों में उस सुकून की गूंज…

हम तलाशते है आज भी तेरी आँखों की चमक,
हर रात आसमानो में

ख्वाहिश

Posted: July 10, 2014 in Hindi poems
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ख्वाहिशें दिल कि पुछो, तो कुछ युं पता सा चले…

कि दिल में अभी भी वो आग है जो धीरे-धीरे से जले…..

 

तमन्नाओं कि लकीरें आज भी जेहन में उभरी सी है…

और मिटाने कि उन्हे दिल कि हसरत आज भी अधुरी सी है….

 

साल गुजर गये, बरस बीत गये…

और हमे आज भी अपने आप को समझाने कि जिद जरुरी सी लगे…

 

धब्बे आज भी मिटे नही है उन अरमानो के….

जिन्हे कुचल कर हमने सोचा था कि निकल गये हम दर्द के तरानो से…..

 

कभी लगता है कि चले वापस फिर उन हसरतो कि पनाहो में…

पर रोक लेती है कमबख्त वो बेड़ियाँ, जो ख़ुशी से डाली थी हमने अपनी बाहों में……

 

समझना चाहा तो बहुत पर फिर भी समझ नही आता…

मारा हमनें उन ख्वाहिशों को, या उन ख्वाहिशों ने हमे मार डाला

रोशनी

Posted: June 27, 2014 in Hindi poems
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दिल ने धकेल कर हमे वक़्त कि लहरो में बहा दिया…
हम डुबने लगे ख़ुशी और दर्द के भंवर में…..
और हाथ- पैर चालाने लगे इधर उधर…
इस उम्मीद पर कि शायद पार हो सके इस समंदर से……
और लग सके सुकून के किसी किनारे पर…

जब हिम्मत टुटने सी लगी और सांस फूलने सी लगी….
और जब आंखो कि चमक फिकी पडने सी लगी…
तभी दूर अंधेरे में एक रोशनी दिखाई सी पडी….
और कानो मे एक गुंज सी आई …..
” आज मत छोड़ना तुम उम्मीद का हाथ, नही तो अमर हो जायेगी तुम्हारे हारने कि आवाज”

हमने थामा फिर से हिम्मत का दामन…..
और जोड़ा हर कण का बल…
आंखो के सामने जिंदगी का हर अक्स आ गया…..
और लहरो को चीर, समंदर को काट….
हम पहुंच गये किनारो के पास…..

चेहरे पर एक छोटी मुस्कुराहट सी आई….
और खुद पर एक गुरुर सा आया….
खयाल आया कि देखूँ कहा से आई वो रोशनी जिसके लिये मै लड़ा….
पलट कर देखा तो…
वो दिल था मेरा जो मशाल लिये था खड़ा….

Here for you

Posted: June 27, 2014 in Uncategorized
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The past you cannot forget or undo,

The future is all we can look forward to…

I wish I could have been there by your side,

For all the times you’ve wept and cried…

Know from my heart, what I say is true,

That I hurt for the pain you have been through…

Never alone you shall be,

Someday, Freedom you will see…

May your hopes and dreams come true,

No matter where you are, I’ll always be here for you…