रोशनी

दिल ने धकेल कर हमे वक़्त कि लहरो में बहा दिया…
हम डुबने लगे ख़ुशी और दर्द के भंवर में…..
और हाथ- पैर चालाने लगे इधर उधर…
इस उम्मीद पर कि शायद पार हो सके इस समंदर से……
और लग सके सुकून के किसी किनारे पर…

जब हिम्मत टुटने सी लगी और सांस फूलने सी लगी….
और जब आंखो कि चमक फिकी पडने सी लगी…
तभी दूर अंधेरे में एक रोशनी दिखाई सी पडी….
और कानो मे एक गुंज सी आई …..
” आज मत छोड़ना तुम उम्मीद का हाथ, नही तो अमर हो जायेगी तुम्हारे हारने कि आवाज”

हमने थामा फिर से हिम्मत का दामन…..
और जोड़ा हर कण का बल…
आंखो के सामने जिंदगी का हर अक्स आ गया…..
और लहरो को चीर, समंदर को काट….
हम पहुंच गये किनारो के पास…..

चेहरे पर एक छोटी मुस्कुराहट सी आई….
और खुद पर एक गुरुर सा आया….
खयाल आया कि देखूँ कहा से आई वो रोशनी जिसके लिये मै लड़ा….
पलट कर देखा तो…
वो दिल था मेरा जो मशाल लिये था खड़ा….

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