प्यार का मतलब

वो पूछते रहे रात भर प्यार का मतलब हमसे,
करते रहे पढ़ने की कोशिश अनपढ़ी किताब…

हम भी रात भर घोंटते रहे गला अपने चीखते हुए दिल का,
डरते रहे निकल न जाये कही वो बात अनकही…

प्यार और दिल का न जाने ये कैसा अजीब रिश्ता है,
कभी कोई शैतान तो कोई फरिश्ता है…

ज़िन्दगी में फैसले बड़े कठिन लगे हमें,
कभी आग में जले तो कभी अँधेरे में थमे…

फिर न जाने ये ज़िन्दगी कैसे मोड़ पर ले आई,
हमारे अंदर कश्मकश ने कैसी आंधी सी मचाई…

तबाह हुए ऐसे की फिर संभल न सके,
अपने प्यार का मतलब दिल के तूफानों से बचा न सके…

मन की संवेदना सब शून्य हो चुकी है,
लफ्ज़, अल्फाज़ो की बस राख सी बची है…

तुम्हे क्या समझाते की जो खुद समझ ना सके हम,
बस कहते रहे की अब हमारे प्यार का मतलब हो बस तुम…

तुम जिसे हमने प्यार का मतलब बनाया,
और अपने प्यार का मतलब भी बस तुम्ही से पाया.

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